क्यों गणेशजी ने लिया वक्रतुंड अवतार?
- hinduchannel7
- Apr 16, 2020
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केहते है कि वक्रतुंड अवतार श्री गणेशजी ने दैत्य मस्तरासुर को मारने के लिए लिया था ! मुद्रल पुराण के अनुसार श्री गणेशजी के बहुत अवतार है ! लेकिन उनके प्रमुख ८ अवतार है ! जिनमे वक्रतुंड पहला अवतार है !
कहते है इन्द्र के प्रमोद से मस्तरासुर का जन्म हुआ था ! उसने
दैत्य गुरु शुक्राचार्य से भगवान शिव के मंत्र "ओम नम: शिवाय" की शिक्षा लेकर उसने शिवजी की कठोर तपस्या की और शिवजी को प्रसन्न किया ! और उनसे अजय का वरदान प्राप्त कर लिया !
जैसे ही उससे वरदान मिला तो शुक्राचार्य ने उसे दैत्य का
राजा बना दिया ! उसने अपनी विशाल शक्तिशाली सेना
बना ली ! उसने पहले आक्रमण किया पुर्थवि पर और सभी
राजा को हरा दिया ! पृथिवी पर विजय पाकर वह
पाताल में विजय प्राप्त कर ली !
इन्द्र लोक भी जीत लिया ! सभी देवता ब्रह्मा और विष्णु
के पास पहुंचे ! वाह से सभी कैलाश महादेव के पास आए !
उनोने शिवजी को सारी बाते बताई और उने मत्सरासुर के
अत्याचारों के बारे में बताया ! सुन कर महादेव भी दुखी हो गए !
अब मस्तरासुर ने कैलाश पर आक्रमण किया और कैलाश
भी जीत लिया ! कैलाश का वो स्वामी बन गया ! तबि वाहा
दतात्रिया आ गए और अनोन वर्कतुंड को मंत्र बताया ! सभी
देवता उस मंत्र का उपचार करने लगे ! देवताओं की उपासना
से वर्कतुं ड प्रसन हुए !
वक्रतुंड विशाल रूप लेकर सीह पर बैठकर वाहा पहुंचे !
देवताओं ने उने अपनी समस्या बताई ! उनोन देवताओं की
रक्षा का वचन दिया ! वे अपने असख्य गानों के साथ
मस्तरासुर के नगरी पहुंचे ! अनोने चारो तरफ से नगरी को
गेर लिया ! बायनक युद्ध की शुरवात हुई ! ५ दिन तक युद्ध
चला ! मस्तरासुर के सुंदरप्रिय और विषयप्रप्ती दोनों पुत्रो की गनो ने हत्या कर दी ! पुत्र वियोग से त्रस्त होकर मस्तरसुर युद्ध के मैदान पर आया ! आते ही उसने वक्रतुंड को अशब्द कहे !
वक्रतुंड ने बरे स्वर में कहा कि अगर अपने जीव चाहते हो
तो अभी हार मनलो और मेरे शरण में आ जाओ ! अन्यथा
निश्चित ही मारे जाओगे ! वक्रतुंड का रूप देखकर मस्तरासुर
भैभित हो गया ! उसकी सारी शक्ति शिन हो गई ! वाह कपने
लगा और वह वक्रतुंड की उपासना करने लगा !
भगवान वक्रतुंड ने उसकी उपासना सुनकर उसे जीवन दान
दिया ! हमेशा के लिए शांत जीवन जीने के लिए उसे पाताल
लोक बेज दिया ! इस तरह देवताओं की मस्तरासुर से वक्रतुंड
ने रक्षा की !






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